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Personality Essay

Short essay on truth in hindi

यह बात सीधेसीधे लागत पूंजी पर निर्भर करती है।उदाहरण के लिएबड़ी लागत वाली कोई कम्पनी Largescale Industry) अपने उत्पादों का विश्वव्यापी विज्ञापन करती है तो एक कम लागत वाली कम्पनी (Smallscale Industry) एक सीमित क्षेत्र तक ही अपने उत्पाद का विज्ञापन कर पाएगी और उसके लिए उसे उसी स्तर पर माध्यमों का चयन करना होगा।विज्ञापन का क्षेत्र अत्यंत विविधतापूर्ण होता है, सब कुछ माया का खेल लगता है, किन्तु सभी कुछ उपयोगितावाद8217; पर आधारित है। विज्ञापन का प्रत्येक स्तर पर अपना एक पृथक् महत्व होता है। सड़कों के किनारे लगे हुए बड़ेबड़े होर्डिंग्स, दीवारों पर लगे पोस्टर अथवा बसों एवं मोटरगाड़ियों के पीछे लिखे विज्ञापन, आदि इन समस्त युक्तियों के पीछे एकमात्र उद्देश्य यह होता है कि अधिक-से-अधिक लोगों का ध्यानाकृष्ट 37 celsius to kelvin essay जाए।जिस प्रकार कोई व्यक्ति किसी अंजान जगह पर पहुंच कर अपने गंतव्य तक पहुंचने हेतु स्वयं when was the first red scare essay के स्थान पर किसी जानकार व्यक्ति से उस जगह के मार्गों इत्यादि के सम्बन्ध में पूछेगा। ठीक इसी प्रकार उत्पादों की भरमार से अटे पड़े वर्तमान बाजारों में भटकते उपभोक्ता के लिए विज्ञापन एक जानकार एवं परामर्शदाता की भूमिका धारण कर चुका है। विज्ञापनों द्वारा नएनए उत्पादों का एवं आविष्कारों अथवा विज्ञान प्रौद्योगिकी द्वारा विकसित की जाने वाली नवीनतम वस्तुओं अथवा उपकरणों का जनसाधारण तक अत्यंत शीघ्रता से परिचय हो जाता है। एक सीमा तक विज्ञापन को समाज में एकरूपता लाने की दिशा में भी प्रभावी रूप में देखा जा सकता है, यद्यपि यह सब तीव्रगामी उपभोक्तावाद के परिणामस्वरूप ही हो रहा है तथापि इसके computer study guide essay वातावरण बनाने का कार्य विज्ञापन द्वारा ही किया गया है ।वर्तमान समय में विज्ञापन एक उद्योग का रूप ग्रहण कर चुका है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कम्पनियां एवं एजेंसियां करोड़ों का लेनदेन कर रही हैं, jonathan weinberger defining terrorism essay दूसरी ओर इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसरों का सृजन भी हो रहा है। भारत में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार दूरदर्शन को विज्ञापनों के प्रसारण से 1500 करोड़ रुपए के राजस्व की प्राप्ति होती है।विज्ञापनों का प्रभाव व्यापक एवं महत्वपूर्ण होता है अतः इसका गलत प्रयोग न हो पाएइस दृष्टिकोण से इसे सरकारी नियंत्रण में रखा गया है। इसके लिए सरकार ने विज्ञापन हेतु एक आचार संहिता (Code of Conduct for Advertisement) का प्रावधान किया है।इस आचार संहिता के अंतर्गत नियंत्रणकारी संस्था एडवरटाइजिंग स्टैण्ड काउंसिल ऑफ इण्डिया द्वारा विज्ञापनों के लिए आदर्श मापदण्डों का निर्धारण किया short essay on truth in hindi है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह है कि जनसाधारण को प्रभावित कर देने वाले विज्ञापनों से व्यावसायिक हित के चलते दिग्भ्रर्मित न किया जा सके, क्योंकि एक सशक्त विज्ञापन में प्रभावित कर सकने की अद्भुत शक्ति एवं क्षमता होती है।अतः सरकार द्वारा इस प्रणाली पर नियंत्रण एवं निरीक्षण अत्यावश्यक है। इस प्रकार यह स्पष्ट हो जाता है कि विज्ञापनों का वर्तमान व्यावसायिक एवं उपभोक्तावादी युग में महत्व अत्यधिक बढ़ गया है।Contents .

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536 words, 1 pages